मातृत्व अवकाश संबंधित समस्त नियम, जानिए किनको मिलेगा 2 से अधिक बच्चों पर मातृत्व अवकाश, और कैसे मिलेगा शिशु देखभाल के 2 साल का अवकाश

राज्य सरकार के कर्मियों को मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश एवं शिशु देखभाल अवकाश के संबंध में ।

उपर्युक्त विषय के संबंध में समस्त नियम निम्नलिखित हैं

1. बिहार सेवा संहिता के नियम-220 तथा वित्त विभागीय संकल्प संख्या-2498, दिनांक 12.04.2007 द्वारा विभिन्न शत्तों के अधीन राज्य सरकार के महिला कर्मियों को मातृत्व अवकाश 90 दिन से बढ़ाकर 135 दिन एवं पुरूष कर्मियों को पितृत्व अवकाश 15 दिन दिये जाने का प्रावधान किया गया है।

2. वित्त विभागीय परिपत्र संख्या-1187, दिनांक 10.02.2011 द्वारा वित्त विभागीय संकल्प संख्या-2498, दिनांक 12.04.2007 की कंडिका-4 (ग) के अन्तर्गत प्रावधान “पितृत्व अवकाश की कालावधि उसके प्रारंभ होने की तिथि से 15 दिनों तक होगी” के संबंध में निम्न स्पष्टीकरण निर्गत किया गया हैः-

“पितृत्व अवकाश, पुरूष कर्मी को जिनकी दो से कम जीवित संतान हो, पत्नी के प्रसय काल में अर्थात् प्रसव की तिथि से 15 (पंद्रह) दिन पहले तक या छः माह बाद तक मिल सकता है। अगर इस अवधि में छुट्टी नहीं ली जाती है तो इसे व्ययगत माना जायेगा ।”

3. वित्त विभागीय संकल्प संख्या-6926, दिनांक 27.07.2011 द्वारा वित्त विभागीय संकल्प संख्या-2498, दिनांक 12.04.2007 की कंडिका-4(प) के अन्तर्गत प्रावधान “मातृत्व/पितृत्व अवकाश का लाभ मात्र दो संतानों के लिए ही अनुमान्य होगा” के संबंध में निम्न प्रावधान किया गया हैः-

“मातृत्व/पितृत्व अवकाश कर्मचारी के जीवित संतान की संख्या दो से कम होने पर स्वीकृत की जाती है। यदि सेवा में आने के पूर्व कोई संतान हो और सेवाकाल में भी संतान पैदा हुई हो तो संतानों की सकल संख्या-दो से कम होने पर ही यह अवकाश अनुमान्य होगा, अर्थात् दोनों स्थिति में मात्र दूसरी संतान होने तक ही मातृत्व पितृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी। सफल संतान दो से अधिक होने या तीसरी संतान की स्थिति में मातृत्य/पितृत्व अवकाश देय नहीं होगा। तीसरी संतान के मामले में सरकारी सेवक को अर्जित अवकाश लेना होगा।”

4. वित्त विभागीय अधिसूचना संख्या-5059, दिनांक 16.06.2014 द्वारा वित्त विभागीय संकल्प संख्या-2498, दिनांक 12.04.2007 की कंडिका-4 (ख) के अन्तर्गत प्रावधान “मातृत्व अवकाश की कालावधि उसके प्रारंभ होने की तिथि से साढ़े चार माह तक या प्रसव तिथि के छः सप्ताह तक जो भी पहले हो बढ़ायी जा सकती है, को निम्न रूप में प्रतिस्थापित किया गया हैः-

“दो से कम जीवित संतान वाली महिला सरकारी सेवक को छुट्टी प्रांरभ की तिथि से 135 दिनों की अवधि के लिए प्रसव छुट्टी दी जा सकेगी। परन्तु यह वैसी महिला सरकारी सेवक के संबंध में भी लागू होगा जो पहले ही प्रसव छुट्टी पर जा चुकी है और उसकी प्रसव छुट्टी समाप्त नहीं हुयी है।”

5. वित्त विभागीय अधिसूचना संख्या-640, दिनांक 19.01.2015 द्वारा वित्त विभागीय संकल्प संख्या-2498, दिनांक 12.04.2007 द्वारा राज्य सरकार के महिला कर्मियों को देय मातृत्व अवकाश 135 दिन से बढ़ाकर 180 दिन किया गया है।

6. बिहार सेवा संहिता के नियम-220A तथा वित्त विभागीय संकल्प संख्या-640, दिनांक 19.01.2015 द्वारा विभिन्न शर्तों के अधीन राज्य सरकार के अवयस्क संतान वाली महिला कर्मचारियों को उनकी संपूर्ण सेवाअवधि के दौरान, केवल दो संतान तक, उनकी परीक्षा, बीमारी की दशा में पालन-पोषण या देखभाल के लिए दो वर्ष (यानि 730 दिन) की शिशु देखभाल अवकाश स्वीकृत करने का प्रावधान किया गया है।

7. वित्त विभागीय परिपत्र संख्या-5632, दिनांक 26.06.2015 द्वारा उपार्जित अवकाश/शिशु देखभाल अवकाश के दौरान छुट्टी वेतन भुगतान के संबंध में निम्न निर्णय लिया गयाः-

(क) सरकारी सेवक को छुट्टी आदेयता प्रमाण पत्र (राजपत्रित पदाधिकारी के मामले में महालेखाकार/वित्त (वैयक्तिक) दावा कोषांग से प्राप्त) के आधार पर सक्षम प्राधिकारी उपार्जित छुट्टी शिशु देखभाल छुट्टी स्वीकृत कर देता है तो वैसी स्थिति में प्रत्येक माह के अंत में छुट्टी वेतन (अर्जित छुट्टी में जाने के पूर्व देय वेतन के बराबर) का भुगतान किया जायेगा। छुट्टी वेतन के अंतर्गत सिर्फ मूल वेतन, ग्रेड पे, महंगाई भत्ता एवं मकान किराया भत्ता ही भुगतान किया जायेगा। परिवहन भत्ता या नियत यात्रा भत्ता भुगतेय नहीं होगा। राशि की निकासी उस स्थापना से होगी जहाँ से वे छुट्टी पर गये ।

(ख) स्वीकृत छुट्टी के उपभोग के क्रम में स्थानान्तरण हो जाने की स्थिति में सरकारी सेवक को नए स्थान पर योगदान/कार्यभार ग्रहण करने के पहले तक छुट्टी वेतन का भुगतान पूर्व स्थापना (जहाँ से छुट्टी पर गये थे) से किया जायेगा ।

(ग) जिन राजपत्रित पदाधिकारियों के मामले में वेतन पूर्जा अपेक्षित है, उन्हें छुट्टी स्वीकृति आदेश के आलोक में छुट्टी वेतन का भुगतान होगा, परन्तु छुट्टी उपभोग के बाद अपने धारित पद का पदभार ग्रहण करने के उपरांत महालेखाकार वित्त (वैयक्तिक) दावा कोषांग द्वारा छुट्टी वेतन पूर्जा निर्गत किया जायेगा तथा उसके आधार पर भुगतान की गयी राशि का सामंजन कर लिया जायेगा ।

8. वित्त विभागीय परिपत्र संख्या-6300, दिनांक 15.07.2015 द्वारा निम्न निदेश निर्गत किया गयाः-

“राज्य सरकार के कर्मियों को जब भी कोई छुट्टी स्वीकृत की जाय तो स्वीकृत्यादेश में अदेय (बाकी) छुट्टी का उल्लेख आवश्यक रूप से किया जाय ।”

अनुरोध है कि उपर्युक्त प्रावधानों/निदेशों का अनुपालन किया जाय ।

उक्त आदेश शिक्षा विभाग के निम्नलिखित ज्ञापांक पर आधारित है

ज्ञापांकः-3/एफ0-01-04/2008:9889/वि०, पटना, दिनांक 01-12-2015.

प्रतिलिपि पीडीएफ


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